अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है ‘आभूषण।’ भाषा को सुन्दर बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है।
अलंकार के उदाहरण:-
‘भूषण बिना न सोहई – कविता, बनिता मित्त।’
अलंकार के भेद/प्रकार कितने होते है?
अलंकार के मुख्यत: तीन भेद होते है, जिनके नाम निम्नानुसार है:-
- शब्दालंकार
- अर्थालंकार
- उभयालंकार
शब्दालंकार किसे कहते है, परिभाषा -
यह अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – शब्द + अलंकार। जिस अलंकार में शब्दों को प्रयोग करने से चमत्कार हो जाता है और उन शब्दों की जगह पर समानार्थी शब्द को रखने से वो चमत्कार समाप्त हो जाये वहाँ शब्दालंकार होता है।
शब्दालंकार के भेद/प्रकार कितने है?
शब्दालंकार के मुख्यत: छः भेद होते है, जिनके नाम निम्नानुसार है:-
- अनुप्रास अलंकार
- पुनरुक्ति अलंकार
- यमक अलंकार
- वक्रोक्ति अलंकार
- विप्सा अलंकार
- शलेष अलंकार
१. अनुप्रास अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
अनुप्रास अलंकार क्या होता है - जब किसी वर्ण की बार – बार आवर्ती हो तब जो चमत्कार होता है उसे अनुप्रास अलंकार कहते है। अनुप्रास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – अनु + प्रास। अनु का अर्थ है - बार-बार और प्रास का अर्थ होता है – वर्ण।
अनुप्रास अलंकार के उदहारण -
विश्व बदर इव धृत उदर जोवत सोवत सूप।
अनुप्रास अलंकार के भेद/प्रकार कितने है?
अनुप्रास अलंकार के मुख्यत: पांच भेद होते है, जिनके नाम निम्न प्रकार है:-
- छेकानुप्रास अलंकार
- लाटानुप्रास अलंकार
- वृत्यानुप्रास अलंकार
- श्रुत्यानुप्रास अलंकार
- अन्त्यानुप्रास अलंकार
छेकानुप्रास अलंकार किसे कहते है, परिभाषा
छेकानुप्रास अलंकार क्या होता है :- जहाँ पर स्वरुप और क्रम से अनेक व्यंजनों की आवृति एक बार हो वहाँ छेकानुप्रास अलंकार होता है।
छेकानुप्रास अलंकार के उदाहरण -
साँसैं भरि आँसू भरि कहत दई दई।।
लाटानुप्रास अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
लाटानुप्रास अलंकार क्या होता है : जब एक शब्द या वाक्य खंड की आवर्ती उसी अर्थ में हो वहाँ लाटानुप्रास अलंकार होता है।
लाटानुप्रास अलंकार के उदाहरण -
तेगबहादुर, हाँ, वे ही थे गुरु-पदवी के पात्र समर्थ,
तेगबहादुर, हाँ, वे ही थे गुरु-पदवी थी जिनके अर्थ।
वृत्यानुप्रास अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
वृत्यानुप्रास अलंकार क्या होता है : जब एक व्यंजन की आवर्ती अनेक बार हो वहाँ वृत्यानुप्रास अलंकार कहते हैं।
वृत्यानुप्रास अलंकार के उदाहरण -
“चामर-सी, चन्दन – सी, चंद – सी,
चाँदनी चमेली चारु चंद-सुघर है।”
श्रुत्यानुप्रास अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
श्रुत्यानुप्रास अलंकार क्या होता है :- जहाँ पर कानों को मधुर लगने वाले वर्णों की आवर्ती हो उसे श्रुत्यानुप्रास अलंकार कहते है।
श्रुत्यानुप्रास अलंकार के उदाहरण -
“दिनान्त था, थे दीननाथ डुबते,
सधेनु आते गृह ग्वाल बाल थे।”
अन्त्यानुप्रास अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
अन्त्यानुप्रास अलंकार क्या होता है : जहाँ अंत में तुक मिलती हो वहाँ पर अन्त्यानुप्रास अलंकार होता है।
अन्त्यानुप्रास अलंकार के उदाहरण -
“लगा दी किसने आकर आग।
कहाँ था तू संशय के नाग?”
२. पुनरुक्ति अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
पुनरुक्ति अलंकार क्या है : पुनरुक्ति अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना है – पुन: +उक्ति। जब कोई शब्द दो बार दोहराया जाता है वहाँ पर पुनरुक्ति अलंकार होता है।
३. यमक अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
यमक अलंकार क्या होता है : यमक शब्द का अर्थ होता है – दो। जब एक ही शब्द ज्यादा बार प्रयोग हो पर हर बार अर्थ अलग-अलग आये वहाँ पर यमक अलंकार होता है।
यमक अलंकार के उदहारण -
कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय।
वा खाये बौराए नर, वा पाये बौराये।
४. वक्रोक्ति अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
वक्रोक्ति अलंकार क्या है : जहाँ पर वक्ता के द्वारा बोले गए शब्दों का श्रोता अलग अर्थ निकाले उसे वक्रोक्ति अलंकार कहते है।
वक्रोक्ति अलंकार के भेद/प्रकार कितने है?
- काकु वक्रोक्ति अलंकार
- श्लेष वक्रोक्ति अलंकार
५. विप्सा अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
विप्सा अलंकार क्या है : जब आदर, हर्ष, शोक, विस्मयादिबोधक आदि भावों को प्रभावशाली रूप से व्यक्त करने के लिए शब्दों की पुनरावृत्ति को ही विप्सा अलंकार कहते है।
विप्सा अलंकार के उदाहरण -
मोहि-मोहि मोहन को मन भयो राधामय।
राधा मन मोहि-मोहि मोहन मयी-मयी।।
६. श्लेष अलंकार किसे कहते है, परिभाषा -
श्लेष अलंकार क्या होता है : जहाँ पर कोई एक शब्द एक ही बार आये पर उसके अर्थ अलग अलग निकलें वहाँ पर श्लेष अलंकार होता है।
श्लेष अलंकार के उदाहरण -
रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।
पानी गए न उबरै मोती मानस चून।।
श्लेष अलंकार के भेद/प्रकार कितने होते है?
- अभंग श्लेष अलंकार
- सभंग श्लेष अलंकार
अभंग श्लेष अलंकार : जिस अलंकार में शब्दों को बिना तोड़े ही अनेक अर्थ निकलते हों वहां पर अभंग श्लेष अलंकार होता है। उदाहरण के लिए - रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुस, चून।।
सभंग श्लेष अलंकार : जिस अलंकार में शब्दों को तोड़े बिना उनका अर्थ न निकलता हो वहां पर सभंग श्लेष अलंकार होता है। उदाहरण के लिए - सखर सुकोमल मंजु, दोषरहित दूषण सहित।
अर्थालंकार किसे कहते है, परिभाषा -
अर्थालंकार क्या होता है : जहाँ पर अर्थ के माध्यम से काव्य में चमत्कार होता हो वहाँ अर्थालंकार होता है।
अर्थालंकार के भेद/प्रकार कितने होते है?
- उपमा अलंकार : उपमा अलंकार क्या होता है - जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरे यक्ति या वस्तु से की जाए वहाँ पर उपमा अलंकार होता है। उदाहरण के लिए - सागर-सा गंभीर ह्रदय हो, गिरी-सा ऊँचा हो जिसका मन। उपमा अलंकार के अंग उपमेय (उपमा देने के योग्य), उपमान(उपमेय की जिसके साथ समानता बताई जाती है), वाचक शब्द(उपमेय और उपमान में समानता के लिए प्रयुक्त शब्द) तथा साधारण धर्म होते है। उपमा अलंकार के दो भेद पूर्णोपमा अलंकार तथा लुप्तोपमा अलंकार होते है।
- रूपक अलंकार : रूपक अलंकार क्या होता है - जहाँ पर उपमेय और उपमान में कोई अंतर न दिखाई दे वहाँ रूपक अलंकार होता है। उदाहरण के लिए - “उदित उदय गिरी मंच पर, रघुवर बाल पतंग। विगसे संत-सरोज सब, हरषे लोचन भ्रंग।।” रूपक अलंकार के तीन भेद - सम रूपक अलंकार, अधिक रूपक अलंकार तथा न्यून रूपक अलंकार
- प्रतीप अलंकार : प्रतीप अलंकार क्या होता है - इसका अर्थ होता है उल्टा। उपमा के अंगों में उल्ट – फेर करने से अथार्त उपमेय को उपमान के समान न कहकर उलट कर उपमान को ही उपमेय कहा जाता है वहाँ प्रतीप अलंकार होता है। उदाहरण - “नेत्र के समान कमल है।”
- उत्प्रेक्षा अलंकार : उत्प्रेक्षा अलंकार क्या होता है - जहाँ पर उपमान के न होने पर उपमेय को ही उपमान मान लिया जाए। अथार्त जहाँ पर अप्रस्तुत को प्रस्तुत मान लिया जाए वहाँ पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। अगर किसी पंक्ति में मनु, मानो, जनु, मेरे जानते, मनहु, निश्चय, ईव आदि आते हैं वहां पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। उदाहरण - सखि सोहत गोपाल के, उर गुंजन की माल। बाहर सोहत मनु पिये, दावानल की ज्वाल।। उत्प्रेक्षा अलंकार के तीन भेद :-वस्तुप्रेक्षा अलंकार, हेतुप्रेक्षा अलंकार तथा फलोत्प्रेक्षा अलंकार
- संदेह अलंकार : संदेह अलंकार क्या होता है - जहाँ पर किसी व्यक्ति या वस्तु को देखकर संशय बना रहे वहाँ संदेह अलंकार होता है। उदाहरण - यह काया है या शेष उसी की छाया, क्षण भर उनकी कुछ नहीं समझ में आया।
- द्रष्टान्त अलंकार : दृष्टान्त अलंकार क्या होता है - जहाँ दो वाक्यों में बिम्ब-प्रतिबिम्ब भाव होता हो वहाँ पर दृष्टान्त अलंकार होता है। इस अलंकार में उपमेय रूप में कहीं गई बात से मिलती-जुलती बात उपमान रूप में दुसरे वाक्य में होती है। यह अलंकार उभयालंकार का भी एक अंग है। उदाहरण - ‘एक म्यान में दो तलवारें, कभी नहीं रह सकती हैं। किसी और पर प्रेम नारियाँ, पति का क्या सह सकती है।।
- उपमेयोपमा अलंकार : उपमेयोपमा अलंकार क्या होता है - इस अलंकार में उपमेय और उपमान को परस्पर उपमान और उपमेय बनाने की कोशिश की जाती है इसमें उपमेय और उपमान की एक दूसरे से उपमा दी जाती है। उदाहरण - तौ मुख सोहत है ससि सो अरु सोहत है ससि तो मुख जैसो।
- अनन्वय अलंकार : अनन्वय अलंकार क्या होता है - जब उपमेय की समता में कोई उपमान नहीं आता और कहा जाता है कि उसके समान वही है, तब अनन्वय अलंकार होता है। उदाहरण - “यद्यपि अति आरत – मारत है. भारत के सम भारत है।
- अतिश्योक्ति अलंकार : अतिश्योक्ति अलंकार क्या होता है - जब किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करने में लोक समाज की सीमा या मर्यादा टूट जाये उसे अतिश्योक्ति अलंकार कहते हैं। उदाहरण - हनुमान की पूंछ में लगन न पायी आगि। सगरी लंका जल गई, गये निसाचर भागि।
- दीपक अलंकार : दीपक अलंकार क्या होता है - जहाँ पर प्रस्तुत और अप्रस्तुत का एक ही धर्म स्थापित किया जाता है वहाँ पर दीपक अलंकार होता है। उदाहरण - चंचल निशि उदवस रहें, करत प्रात वसिराज।अरविंदन में इंदिरा, सुन्दरि नैनन लाज।।
- अपहृति अलंकार : अपहृति अलंकार क्या होता है - अपहृति का अर्थ होता है "छिपाव"। जब किसी सत्य बात या वस्तु को छिपाकर उसके स्थान पर किसी झूठी वस्तु की स्थापना की जाती है वहाँ अपहृति अलंकार होता है। उदाहरण - “सुनहु नाथ रघुवीर कृपाला, बन्धु न होय मोर यह काला।”
- भ्रांतिमान अलंकार : भ्रांतिमान अलंकार क्या होता है - जहाँ उपमान और उपमेय दोनों को एक साथ देखने पर उपमान का निश्चयात्मक भ्रम हो जाये वहाँ भ्रांतिमान अलंकार होता है। उदाहरण - पायें महावर देन को नाईन बैठी आय । फिरि-फिरि जानि महावरी, एडी भीड़त जाये।।
- विभावना अलंकार : विभावना अलंकार क्या होता है - जहाँ पर कारण के न होते हुए भी कार्य का हुआ जाना पाया जाए वहाँ पर विभावना अलंकार होता है।
- विशेषोक्ति अलंकार : विशेषोक्ति अलंकार क्या होता है - काव्य में जहाँ कार्य सिद्धि के समस्त कारणों के विद्यमान रहते हुए भी कार्य न हो वहाँ पर विशेषोक्ति अलंकार होता है। उदाहरण - नेह न नैनन को कछु, उपजी बड़ी बलाय। नीर भरे नित-प्रति रहें, तऊ न प्यास बुझाई।।
- व्यतिरेक अलंकार : व्यतिरेक अलंकार क्या होता है - व्यतिरेक का शाब्दिक अर्थ होता है - आधिक्य। जहाँ उपमान की अपेक्षा अधिक गुण होने के कारण उपमेय का उत्कर्ष हो वहाँ पर व्यतिरेक अलंकार होता है। उदाहरण - का सरवरि तेहिं देउं मयंकू। चांद कलंकी वह निकलंकू।।
- उल्लेख अलंकार : उल्लेख अलंकार क्या होता है - जब किसी एक वस्तु को अनेक प्रकार से बताया जाये वहाँ पर उल्लेख अलंकार होता है। उदाहरण - विन्दु में थीं तुम सिन्धु अनन्त एक सुर में समस्त संगीत।
- विरोधाभाष अलंकार : विरोधाभाष अलंकार क्या होता है - जब किसी वस्तु का वर्णन करने पर विरोध न होते हुए भी विरोध का आभाष हो वहाँ पर विरोधाभास अलंकार होता है। उदाहरण - ‘आग हूँ जिससे ढुलकते बिंदु हिमजल के। शून्य हूँ जिसमें बिछे हैं पांवड़े पलकें।’
- असंगति अलंकार : असंगति अलंकार क्या होता है - जहाँ आपतात: विरोध दृष्टिगत होते हुए, कार्य और कारण का वैयाधिकरन्य रणित हो वहाँ पर असंगति अलंकार होता है। उदाहरण - “ह्रदय घाव मेरे पीर रघुवीरै।”
- काव्यलिंग अलंकार : काव्यलिंग अलंकार क्या होता है - जहाँ पर किसी बात के समर्थन में कोई-न-कोई युक्ति या कारण जरुर दिया जाता है। उदाहरण - कनक कनक ते सौगुनी, मादकता अधिकाय। उहि खाय बौरात नर, इहि पाए बौराए।।
- मानवीकरण अलंकार : मानवीकरण अलंकार क्या होता है - जहाँ जड़ प्रकृति पर मानवीय भावनाओं और क्रियांओं का आरोप हो वहाँ पर मानवीकरण अलंकार होता है। जब प्रकृति के द्वारा निर्मित चीजों में मानवीय भावनाओं के होने का वर्णन किया जाए वहां पर मानवीकरण अलंकार होता है। उदाहरण - बीती विभावरी जागरी, अम्बर पनघट में डुबो रही तास घट उषा नगरी।
- अन्योक्ति अलंकार : अन्योक्ति अलंकार क्या होता है - जहाँ पर किसी उक्ति के माध्यम से किसी अन्य को कोई बात कही जाए वहाँ पर अन्योक्ति अलंकार होता है। उदाहरण- फूलों के आस-पास रहते हैं, फिर भी काँटे उदास रहते हैं।
- अर्थान्तरन्यास अलंकार : अर्थान्तरन्यास अलंकार क्या होता है - जब किसी सामान्य कथन से विशेष कथन का अथवा विशेष कथन से सामान्य कथन का समर्थन किया जाये वहाँ अर्थान्तरन्यास अलंकार होता है। उदाहरण - बड़े न हूजे गुनन बिनु, बिरद बडाई पाए। कहत धतूरे सों कनक, गहनो गढ़ो न जाए।।
- स्वभावोती अलंकार : स्वभावोक्ति अलंकार क्या होता है - किसी वस्तु के स्वाभाविक वर्णन को स्वभावोक्ति अलंकार कहते हैं। उदाहरण - सीस मुकुट कटी काछनी, कर मुरली उर माल। इहि बानिक मो मन बसौ, सदा बिहारीलाल।।
३. उभयालंकार किसे कहते है, परिभाषा -
जो अलंकार शब्द और अर्थ दोनों पर आधारित रहकर दोनों को चमत्कारी करते हैं वहाँ उभयालंकार होता है।
उभयालंकार के उदाहरण -
‘कजरारी अंखियन में कजरारी न लखाय।’
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